C
1. क्रेडिट रेटिंग (खराब हालत वाली कंपनियां)
रेटिंग एजेंसियां जैसे CRISIL या ICRA जब किसी भारतीय कंपनी को 'C' रेटिंग देती हैं, तो उसका मतलब है कि कंपनी बहुत संकट में है।
- उदाहरण: Reliance Naval या Jet Airways (दिवालिया होने के दौरान)। जब इन कंपनियों की रेटिंग 'C' या 'D' तक गिर गई, तो निवेशकों को पता चल गया कि अब इनका पैसा डूबने वाला है और बैंक इन्हें नया लोन नहीं देंगे।
2. क्लास C शेयर (बिना वोटिंग वाले शेयर)
भारत में इसे DVR (Differential Voting Rights) शेयर कहा जाता है। इसमें आपको मुनाफा तो मिलता है, लेकिन कंपनी के फैसलों में वोट देने का अधिकार या तो कम होता है या बिल्कुल नहीं होता।
- उदाहरण: Tata Motors DVR। बाज़ार में टाटा मोटर्स के साधारण शेयर भी हैं और DVR शेयर भी। DVR शेयर अक्सर सस्ते मिलते हैं क्योंकि उनमें वोटिंग की पावर कम होती है, लेकिन डिविडेंड (मुनाफा) कभी-कभी साधारण शेयर से भी ज़्यादा मिलता है।
3. म्यूचुअल फंड क्लास (Expense Ratio)
भारत में हम Class A, B, C की जगह "Direct" और "Regular" प्लान्स का इस्तेमाल करते हैं।
- उदाहरण: अगर आप SBI Bluechip Fund में निवेश करते हैं, तो 'Regular' प्लान में एजेंट का कमीशन जुड़ा होता है (Class C की तरह जिसमें सालाना चार्ज ज़्यादा होता है), जबकि 'Direct' प्लान में कोई कमीशन नहीं होता। भारत में निवेशक अब 'Direct' प्लान को ज़्यादा पसंद करते हैं ताकि ज़्यादा कमीशन न कटे।
4. स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस (लोन की प्राथमिकता)
जब भारतीय बैंक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (जैसे कोई नया National Highway) को लोन देते हैं, तो पैसे की वसूली की प्राथमिकता तय होती है।
- उदाहरण: एक सड़क प्रोजेक्ट में, टोल से आने वाला पैसा पहले सरकारी बैंक (Class A/Senior) को जाता है। Class C वाले वे छोटे निवेशक या कंपनियां होती हैं जिन्हें पैसा सबसे आखिर में मिलता है। अगर टोल की कमाई कम हुई, तो Class C वालों का पैसा सबसे पहले डूबेगा।
May 9, 2026 4:59 PM
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